आदिवासी की

 जब जल_जंगल_जमीन की लूट सँगठित झुंड द्वारा की जा रही है तो उक्त लूट की रक्षार्थ आदिवासियों का संयुक्त प्रतिरोध नक्सलवाद कैसे हो सकता है?

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